रविवार, 20 सितंबर 2015

पर्यावरण एंथम(कविता)

मैं धरती की संवेदना हूँ ,
हवाओं में ताजगी का अहसास हूँ ,
उज्जवल आकाश का राज हूँ ,
मैं वसुंधरा की शान हूँ
ध्यान जो मेरा नहीं रखेगा ,
अस्तित्व उसका खतरे में होगा ,
मै परिवेशी वायु गुणता हूँ ,
मृदा - धर्म रक्षिता हूँ
जल की मृदुलता - मापक हूँ ,
धरती पर जवन का संवाहक हूँ ,
रखोगे ध्यान जो मेरा ,
मै सब कुछ कलुष करता हूँ

मै हूँ स्वच्छ पर्यावरण ,
धरती माँ का संरक्षक ,
खाद्य सुरक्षा , चक्र प्रवर्तक
जीवन - रक्षा पथ प्रदर्शक ,
ब्रह्माण्ड धरा नित संवाहक

मुझमे है निहित...
सैकड़ों ब्रह्माण्ड और आकाश गंगा ,
पृथ्वी , वनस्पतियाँ और आदि गंगा
मेरी ही अर्चन से ....
आह्लादित होगा , जग सारा ,

धरती , वायु और नभ तारा

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